रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की कटौती करते हुए रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया है।
यह कदम 2019 के बाद सबसे तेज़ और आक्रामक दर-कटौती चक्र का हिस्सा माना जा रहा है।
यह फैसला क्यों लिया गया?
✔ महंगाई नियंत्रित दायरे में है — खाद्य मूल्य स्थिर रहे हैं और कोर इंफ्लेशन में गिरावट आई है।
✔ आर्थिक गतिविधियों में धीमी रिकवरी देखी जा रही है, जिसे RBI प्रोत्साहन देना चाहता है।
✔ वैश्विक स्तर पर भी कई देशों के केंद्रीय बैंक “कम ब्याज दर” नीति की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे भारत भी उसी लाइन में चल रहा है।
इसका जनता और बाजार पर क्या असर होगा?
➡ होम लोन, ऑटो लोन और एजुकेशन लोन सस्ते होने की संभावना।
➡ EMI पर दबाव कम हो सकता है — नई दरें लागू होने पर ग्राहकों को राहत मिलेगी।
➡ MSME, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए कर्ज लेना आसान होगा।
➡ रीयल एस्टेट सेक्टर, ऑटो इंडस्ट्री और उपभोक्ता मांग में तेज़ी आने की उम्मीद।
बाजार की प्रतिक्रिया
📌 शेयर बाजार में बैंकिंग और रियल्टी स्टॉक्स में सकारात्मक रुझान दिखाई दिया।
📌 बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई, संकेत है कि बाजार दरों में भी धीरे-धीरे नरमी आ सकती है।
📌 आर्थिक विशेषज्ञ इसे ‘मौद्रिक ढील की शुरुआत’ (Beginning of Monetary Easing Cycle) मान रहे हैं।
RBI का संदेश
गवर्नर ने स्पष्ट कहा कि:
“हम विकास को समर्थन देने के लिए आवश्यक कदम उठाते रहेंगे, लेकिन मूल्य स्थिरता हमारी प्राथमिकता है।”







