CBI को मिली जांच की हरी झंडी, राज्य सरकार पर विपक्ष का निशाना
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के साहिबगंज में हुए कथित पत्थर-खनन घोटाले की जांच CBI को सौंपने के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि इस मामले की जांच राज्य एजेंसियां ही कर सकती हैं और केंद्रीय जांच एजेंसी की आवश्यकता नहीं है।
🔍 क्या है मामला?
साहिबगंज में बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन, सरकारी राजस्व की भारी हानि और पर्यावरणीय नुकसान का आरोप लगा था। इस मामले में कथित तौर पर कई प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता बताई जा रही है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
- हाई कोर्ट द्वारा दिए गए CBI जांच के आदेश को सही ठहराया
- राज्य सरकार की आपत्तियों को खारिज किया
- कहा कि गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच ज़रूरी है
- जांच की सीमा को सीमित करने का राज्य का प्रयास सही नहीं
🔥 राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
फैसले के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है।
- विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह “घोटाले को दबाने” की कोशिश कर रही थी।
- राज्य सरकार का कहना है कि वह निर्णय का सम्मान करती है, लेकिन जांच में किसी तरह की राजनीतिक मंशा नहीं होनी चाहिए।
📌 आगे क्या?
CBI अब मामले की विस्तारित जांच कर सकेगी—
- खनन लाइसेंस
- वित्तीय लेनदेन
- मनी लॉन्ड्रिंग
- प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों की भूमिका
सब शामिल हो सकते हैं।
📝 निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने साहिबगंज अवैध खनन मामले को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में CBI की कार्रवाई और इसके राजनीतिक प्रभाव पर सभी की नजर रहेगी।







