नई दिल्ली: भारतीय रुपया हाल ही में ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जिसके बाद भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मुद्रा को सहारा देने के लिए आक्रामक हस्तक्षेप किया है। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय होकर रुपये की तेज़ गिरावट पर लगाम लगाने की कोशिश की।
💱 क्यों कमजोर हुआ रुपया?
विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये पर दबाव बढ़ने के प्रमुख कारण हैं —
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती
- वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी
🏦 RBI का हस्तक्षेप
सूत्रों के अनुसार RBI ने —
- डॉलर की बिक्री कर बाजार में तरलता बढ़ाई
- अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए सीधा हस्तक्षेप किया
- संकेत दिया कि वह रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा
📉 बाजार पर असर
RBI के कदमों के बाद रुपये की गिरावट कुछ हद तक थमी, हालांकि बाजार अभी भी वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए है। निवेशकों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक की सक्रिय भूमिका से मुद्रा बाजार में स्थिरता आएगी।
🗣️ विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि RBI का यह कदम मुद्रास्फीति नियंत्रण, आयात लागत को सीमित करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी था।







