भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई नेताओं ने स्वीकार किया है कि पार्टी की “vote-chori” (वोट चोरी) वाली मुहिम ने उल्टा असर डाला।
इनसाइडर्स के अनुसार, कांग्रेस ने पूरे चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों पर ज़रूरत से ज़्यादा जोर दिया, जबकि आम लोगों के स्थानीय मुद्दों — महंगाई, बेरोज़गारी, रोज़मर्रा की परेशानियाँ — को उतनी प्राथमिकता नहीं दी गई।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वोट चोरी का नैरेटिव मतदाताओं से जुड़ नहीं पाया, और जनता उन समस्याओं पर समाधान चाहती थी जो सीधे उनके जीवन को प्रभावित करती हैं।
इसी “नैरेटिव मिसमैच” को बिहार में खराब प्रदर्शन की बड़ी वजह माना जा रहा है।







