महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक बड़ी कार्रवाई के दौरान झारखंड की एक महिला, उसके पति और उनके चार नाबालिग बच्चों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया गया।
परिवार को बेहद खराब परिस्थितियों में मजबूरन काम कराया जा रहा था, जहाँ उनकी स्वतंत्रता और बुनियादी अधिकारों पर गंभीर प्रतिबंध थे।
यह घटना झारखंड से अन्य राज्यों में होने वाले अंतरराज्यीय पलायन और उससे जुड़े श्रम शोषण की गंभीर समस्या को उजागर करती है। कई गरीब परिवार रोजगार की तलाश में बाहर जाते हैं, लेकिन बीच रास्ते में दलालों और शोषकों के जाल में फँस जाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि परिवार को सुरक्षित निकाल लिया गया है और उन्हें पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे सुरक्षित रूप से झारखंड वापस लौट सकें।







