धनबाद, झारखंड — 5 दिसंबर 2025:
धनबाद के केंदुआडिह क्षेत्र में गुरुवार सुबह हुए संदिग्ध जहरीली गैस रिसाव से दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। कई अन्य लोग आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और चक्कर जैसी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराए गए। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी फैल गई।
घटना कैसे हुई
स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह अचानक तेज और अजीब गंध फैलने लगी। कुछ ही मिनटों में कई लोग बेहोश होकर गिरने लगे। दो महिलाओं को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गैस का स्रोत जमीन के भीतर से निकलता प्रतीत हुआ, जिससे यह संदेह गहरा गया कि यह रिसाव परित्यक्त कोयला खदानों से हो सकता है—धनबाद में यह समस्या पहले भी सामने आती रही है।
आपदा प्रबंधन दल की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और प्रभावित घरों को खाली कराया गया। मेडिकल टीमों ने अस्थायी कैंप लगाकर प्रभावित लोगों का उपचार शुरू किया।
हालांकि, स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की प्रतिक्रिया धीमी और लापरवाहीपूर्ण थी। उनका कहना है कि कई महीनों से भूमिगत गर्मी, धुआं और धंसान जैसी समस्याओं की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
संभावित कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना कार्बन मोनोऑक्साइड या अन्य जहरीली गैसों के रिसाव से हुई हो सकती है, जो अक्सर छोड़े गए या बंद खदानों के भीतर जमा हो जाती हैं।
प्रशासन ने गैस के वास्तविक स्रोत और प्रकार की पुष्टि हेतु उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
लोगों का गुस्सा और मांगें
घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने जिला कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और मांग की:
- प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा
- खतरनाक खदान क्षेत्रों के पास बसे परिवारों का पुनर्वास
- कोयला कंपनियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
- पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए
कई परिवार खतरे की आशंका में अस्थायी रूप से दूसरे इलाकों में चले गए हैं।
प्रशासन का बयान
जिला अधिकारियों ने कहा कि स्थिति “नियंत्रण में” है और गैस स्तरों की निगरानी के लिए विशेष टीम तैनात की गई है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे कम ऊंचाई वाले, बंद या घनी आबादी वाले क्षेत्रों से फिलहाल दूरी बनाए रखें।
जोखिम भरा क्षेत्र
धनबाद दशकों से भू-धंसान, भूमिगत आग और गैस उत्सर्जन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पुनर्वास और सुरक्षा उपायों पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो ऐसे हादसे भविष्य में और बढ़ सकते हैं।






